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Singhia News: बिना लाइसेंस दवा दुकान, निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच की मांग

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Samastipur News | Singhia News | सिंघिया प्रखंड क्षेत्र में दवा दुकानों, निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की लाइसेंस व नियमों के आधार पर जांच की मांग उठी है।

सिंघिया, 17 अगस्त। आलम की खबर:सिंघिया प्रखंड क्षेत्र में संचालित दवा दुकानों, निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी जांच केंद्रों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की व्यापक जांच कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठाया जा रहा है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी प्रतिष्ठान वैध लाइसेंस, पंजीकरण और निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो रहे हैं या नहीं। इसी को लेकर सिविल सर्जन से सिंघिया प्रखंड क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की गई है।

मांग उठाने वालों का कहना है कि दवा दुकान से लेकर निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े हैं। ऐसे में इनके संचालन में नियमों का पालन होना बेहद जरूरी है। किसी भी संस्थान के पास आवश्यक अनुमति या लाइसेंस नहीं है तो इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

दवा दुकानों के लाइसेंस और दवाओं की भी हो जांच

सिंघिया बाजार एवं प्रखंड क्षेत्र में संचालित दवा दुकानों की जांच के दौरान सबसे पहले यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित दुकानदार के पास वैध ड्रग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं। इसके साथ ही दवाओं के रख-रखाव, एक्सपायरी दवाओं, बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और आवश्यक नियमों के पालन की भी जांच की जानी चाहिए।

दवा लोगों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी होती है। इसलिए बिना आवश्यक लाइसेंस अथवा नियमों के विपरीत दवाओं की बिक्री की शिकायतों को स्वास्थ्य विभाग को गंभीरता से लेना चाहिए। जांच होने पर वास्तविक स्थिति भी सामने आ सकेगी और वैध तरीके से कारोबार करने वाले दवा दुकानदारों को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

निजी अस्पताल और क्लीनिक भी जांच के दायरे में आएं

सिंघिया क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों की भी जांच की मांग की गई है। जांच टीम यह देख सकती है कि संबंधित संस्थान पंजीकृत हैं या नहीं और वहां मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

अस्पतालों में चिकित्सकीय व्यवस्था, आवश्यक सुविधाएं, साफ-सफाई, मरीजों की सुरक्षा और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित नियमों की भी जांच जरूरी बताई जा रही है।

पैथोलॉजी जांच केंद्रों की जांच जरूरी

पैथोलॉजी जांच केंद्रों को भी जांच अभियान में शामिल करने की मांग की गई है। मरीजों के इलाज में जांच रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि जांच केंद्र निर्धारित नियमों और तकनीकी मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं।

जांच के दौरान पंजीकरण, उपलब्ध मशीन एवं उपकरण, जांच प्रक्रिया तथा रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था समेत आवश्यक बिंदुओं को देखा जा सकता है। यदि किसी केंद्र में कमी मिलती है तो उसे नियम के अनुसार दूर कराया जा सकता है।

अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भी हो सघन जांच

इस पूरे मामले में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताई जा रही है। मांग है कि सिंघिया प्रखंड क्षेत्र में संचालित सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के आवश्यक पंजीकरण, अनुमति और निर्धारित मानकों की जांच की जाए।

अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सेवाओं का संचालन निर्धारित कानूनी और चिकित्सकीय नियमों के तहत किया जाना जरूरी है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की टीम यदि क्षेत्र के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच करती है तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-कौन से केंद्र वैध दस्तावेजों और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं।

बिहार के अन्य जिलों में भी स्वास्थ्य विभाग की जांच टीमों द्वारा नर्सिंग होम, जांच घर, क्लीनिक, अल्ट्रासाउंड सेंटर और दवा दुकानों को एक साथ जांच के दायरे में लिए जाने के उदाहरण सामने आए हैं।

प्रधान संपादक संजय कुमार भी लगातार उठा रहे हैं मामला

इस मुद्दे को P.News के प्रधान संपादक संजय कुमार भी लगातार प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पेज के माध्यम से भी सिंघिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों की जांच और व्यवस्था में सुधार का मुद्दा उठाया है। इसके अलावा खबरों के माध्यम से भी वह समय-समय पर इस विषय को सामने लाते रहे हैं।

उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा कोई भी संस्थान नियमों से ऊपर नहीं होना चाहिए। यदि किसी संस्थान के पास सभी जरूरी लाइसेंस और अनुमति मौजूद हैं तो जांच के बाद स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

इस मुद्दे को लगातार उठाने का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्थान को बदनाम करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए नियमित निगरानी जरूरी है।

जांच से साफ होगी वास्तविक तस्वीर

स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंघिया क्षेत्र में एक बार व्यापक जांच अभियान चलाकर दवा दुकानों, निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी जांच केंद्रों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।

जांच में यदि सभी संस्थान नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं तो इससे संबंधित संचालकों को भी राहत मिलेगी और आम लोगों का भरोसा बढ़ेगा। वहीं यदि कहीं लाइसेंस, पंजीकरण अथवा निर्धारित मानकों से संबंधित कमी मिलती है तो स्वास्थ्य विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

CS से जांच टीम भेजने की मांग

मांग की गई है कि सिविल सर्जन के स्तर से एक विशेष टीम गठित कर सिंघिया प्रखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों का निरीक्षण कराया जाए। जांच में दवा दुकान, निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी जांच केंद्र और अल्ट्रासाउंड सेंटर सभी को शामिल किया जाए।

साथ ही जांच के बाद सामने आने वाली स्थिति को स्पष्ट किया जाए और यदि कहीं अनियमितता मिलती है तो संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और आम लोगों के हितों की भी रक्षा होगी।

अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन की ओर है कि सिंघिया प्रखंड क्षेत्र में उठ रही इस मांग पर क्या कदम उठाया जाता है।

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सिंघिया क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और जनहित से जुड़े अन्य समाचार पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar के स्थानीय अपडेट देखते रहें।

स्वास्थ्य संस्थानों की जांच जनहित में जरूरी

सिंघिया जैसे प्रखंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग स्थानीय दवा दुकानों, निजी क्लीनिकों, अस्पतालों और जांच केंद्रों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए इन संस्थानों की नियमित निगरानी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

लाइसेंस और पंजीकरण की जांच के साथ यह भी देखना जरूरी है कि संबंधित संस्थान निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। खासकर पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सेवाओं में नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।

ऐसे में सिंघिया में व्यापक जांच की मांग को किसी एक संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की मांग के बजाय पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शी जांच की मांग के रूप में देखा जाना चाहिए। प्रधान संपादक संजय कुमार द्वारा इस मुद्दे को अपने फेसबुक पेज और समाचारों के माध्यम से लगातार उठाया जाना भी इस बात को रेखांकित करता है कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर लोगों में चिंता है।

स्वास्थ्य विभाग यदि निष्पक्ष जांच कराता है तो वास्तविक स्थिति सामने आएगी। जो संस्थान नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं, उनकी स्थिति स्पष्ट होगी और जहां अनियमितता मिलेगी, वहां नियमानुसार सुधार या कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। यही प्रक्रिया आम लोगों के भरोसे को मजबूत करेगी।

रिपोर्ट/जी एम सिंह 

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